अबूझ मुहूर्त पर नहीं होंगे विवाह, गुरु तारा अस्त से पाणिग्रहण संस्कार पर रोक
इस साल भड़ली नवमी का पर्व 4 जुलाई शुक्रवार को मनाया जाएगा, जो आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ता है। यह पर्व हर साल भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे अबूझ मुहूर्त यानी बिना किसी ज्योतिषीय गणना के शुभ दिन के रूप में जाना जाता है। आमतौर पर इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे कार्य बिना विशेष मुहूर्त के किए जाते हैं। हालांकि, इस वर्ष भड़ली नवमी पर पाणिग्रहण संस्कार (विवाह) नहीं होंगे, क्योंकि विवाह के प्रमुख ग्रह गुरु के अस्त होने के कारण विवाह करना वर्जित माना गया है।
गुरु तारा अस्त, क्यों नहीं होंगे विवाह संस्कार?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, गुरु इस समय मिथुन राशि में अस्त हैं। हिंदू शास्त्रों में गुरु को विवाह का प्रमुख कारक माना गया है। जब गुरु अस्त होते हैं, तब विवाह के बाद दांपत्य जीवन में बाधाएं, कलह और अन्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए यह समय विवाह के लिए अशुभ है, भले ही दिन अबूझ मुहूर्त क्यों न हो।
अन्य शुभ कार्यों पर कोई रोक नहीं
भले ही विवाह पर रोक है, लेकिन भड़ली नवमी के दिन अन्य सभी मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। इनमें गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, नई संपत्ति या वाहन की खरीद, व्यवसाय की शुरुआत और अन्य शुभ काम शामिल हैं।
मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने से समस्त इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
देवशयनी एकादशी और चातुर्मास
भड़ली नवमी के दो दिन बाद 6 जुलाई को देवशयनी एकादशी आएगी, जिससे चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। शास्त्रों के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी, गृह प्रवेश, नामकरण आदि नहीं किए जाते हैं। ये सभी कार्य देवउठनी एकादशी (इस साल 1 नवंबर) के बाद ही दोबारा आरंभ होते हैं।

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