स्वयं सिद्ध मुहूर्त में से एक अक्षय तृतीया पर बनेगा त्रिवेणी संयोग
कभी क्षय नहीं होने वाला पुण्य फल दाता पर्व अक्षय तृतीया (आखातीज) इस वर्ष 30 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस अवसर पर रवि, शोभन एवं सर्वार्थ सिद्धि का मंगलकारी संयोग बनेगा।
वहीं इसी दिन परशुराम जन्मोत्सव मनाया जाता है। इसके उपलक्ष्य में शहर के पूर्वी और पश्चिम क्षेत्र से शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। स्वयं सिद्ध मुहूर्त में से एक आखातीज पर वैवाहिक आयोजन भी बड़ी संख्या में होंगे।
ज्योतिर्विद ने बताया कि वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया 29 अप्रैल को शाम पांच बजकर 31 मिनट से 30 अप्रैल को दोपहर दो बजकर 12 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि में तृतीया 30 अप्रैल को होने से इसी दिन अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। इस दिन पूजा के लिए श्रेष्ठ समय सुबह पांच बजकर 41 मिनट से दोपहर दो बजकर 12 मिनट तक छह घंटे 31 मिनट रहेगा।
इस दौरान सोना-चांदी के साथ ही चल-अचल संपत्ति खरीदना भी लाभदायक रहेगा। इस दिन शाम चार बजकर 18 मिनट से रवि योग लगेगा। इसके अतिरिक्त शोभन योग 29 अप्रैल को दोपहर 3.53 से 30 अप्रैल को दोपहर 12 बजे तक रहेगा। इस दिन कार्य में सिद्धि देने वाला सर्वार्थसिद्धि योग भी रहेगा।

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