बच्चे किसी भी स्थिति में स्कूल न छोड़ें, इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। बच्चों को अगली कक्षा में दाखिला दिलाने की जवाबदारी भी शिक्षकों की होगी। मॉनीटरिंग के लिए स्कूल शिक्षा विभाग तकनीक का सहारा लेगा। एक कक्षा में उत्तीर्ण कर यदि बच्चे ने दाखिला नहीं लिया, तो शिक्षक की कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट यानी सीआ खराब हो सकती है। पिछले साल करीब 20 लाख बच्चे ड्रॉपआउट हुए थे, जिसके बाद लोक शिक्षण यह नीति लागू करने जा रहा है। बता दें, विभाग को हर साल बच्चों के दाखिला लेने का आंकड़ा जमा करना है। पिछले साल से जब इसका मिलान हुआ तो पता लगा बीस लाख बच्चे कम हैं। बताया गया, ड्रॉपआउट छात्रों की संया बढ़ी है। इसका नतीजा ये हुआ कि कई स्कूल बंद होने की नौबत आई। इस साल प्रदेश में करीब 400 स्कूल बंद किए गए। इनमें चार भोपाल जिले से भी हैं। फिर ये नौबत न आए, इसके लिए ड्रॉपआउट को रोका जाएगा। ये प्राइमरी, मिडिल, हाई स्कूल स्तर पर एडमिशन के लिए लागू होगा। पास कराने से अगली कक्षा में दाखिले तक का जिमा शिक्षक का जो नई नीति तैयार हो रही है, उसके तहत यह प्रावधान होगा कि छात्र को उत्तीर्ण कराने से लेकर अगली कक्षा में दाखिला कराने तक की जिमेदारी शिक्षक की होगी। प्राइमरी स्कूलों में पा ंचवीं के बाद बच्चे को टीसी देकर स्कूल छोड़ नहीं सकता। उसे छठी कक्षा में दाखिला दिलाना होगा।
बच्चे को पढ़ाने में शिक्षक अपनी जिमेदारी निभा रहे हैं। इस नियम में अधिकारियों की भी जवाबदारी तय होगी। पूरा जिमा शिक्षकों पर दिया जा रहा है। इससे रिजल्ट बेहतर होंगे। उपेन्द्र कौशल, अध्यक्ष मप्र अध्यापक संगठन

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