Wednesday, 3 June 2020

भूपेश सरकार का वन अधिकारों पर यू-टर्न


छत्तीसगढ़ में सामाजिक संगठनों के बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने अपने उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें वन अधिकार देने के लिए वन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया था। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन सहित एक दर्जन संगठनों ने इसका विरोध किया था। इससे पहले केंद्र की यूपीए सरकार ने वन अधिकारों के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग को अधिकृत किया था।

राज्य की बघेल सरकार ने इसे बदलकर वन विभाग को नोडल एजेंसी बना दिया था। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव डीडी सिंह ने बताया कि सामुदायिक वन अधिकार को मान्यता के लिए वन विभाग को केवल समन्वय का दायित्व सौंपा गया है। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला ने सरकार के ताजा आदेश का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि वन विभाग को नोडल एजेंसी बनाने से दिक्कत बढ़ती।
संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के जरिए ग्राम सभा के अधिकारों का हनन करके वन विभाग अपने एजेंडे को आगे बढ़ाता। इससे समाज में द्वंद्व खड़ा हो सकता था। केंद्र के आदिवासी कार्य मंत्रालय ने 27 सितंबर 2007 और 11 जनवरी 2008 को राज्यों को लिखे पत्र में जोर दिया था कि आदिवासी विकास विभाग ही नोडल एजेंसी होगा। सरकार ने सामुदायिक वन अधिकारों की मान्यता, विशेषकर ग्राम सभा की ओर से वन का प्रबंधन करने का अधिकार सुनिश्चित करने की प्रतिद्धता दिखाई है।

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