Sunday, 3 May 2020

भगवान नृसिंह की आराधना से इन समस्याओं से मिलता है छुटकारा


वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान श्राीहरी ने नृसिंह अवतार लिया था। इसलिए इस तिथि को भगवान नृसिंह का जन्मोत्सव मनाया जाता है। भगवान नृसिंह श्रीहरी के क्रोधावतार माने जाते हैं। क्योंकि उन्होंने क्रोध करते हुए हिरण्यकशिपु का वध किया था। मान्यता है कि क्रोधाग्नि के कारण भगवान नृसिंह का शरीर जलता है इसलिए उनको ठंडी वस्तुएं समर्पित करने का विधान है।

भगवान नृसिंह को चढ़ाएं नागकेसर
नृसिंह जयंती के दिन सूर्योदय के पूर्व उठकर स्नान ध्यान से निवृत्त होकर भगवान नृसिंह की आराधना करें। अपने धन की बचत करने के लिए भगवान नृसिंह को इस दिन नागकेसर समर्पित करें। इसमें से थोड़ी सी नागकेसर घर की तिजोरी में रख दें। धन की बचत होगी। यदि आपकी कुंडली में कालसर्पदोष है तो इस दिन भगवान नृसिंह मंदिर में जाकर एक मोरपंख उनको चढ़ा दें। इस दोष का निवारण होगा।
कानूनी मामलों में मिलती है सफलता
किसी भी प्रकार की कानूनी समस्या में जीत हासिल करने के लिए नृसिंह जयंती पर उनको दही समर्पित करें। भगवान नृसिंह को ठंडा पानी चढ़ाने से अनजाान शत्रुओं के भय का नाश होता है और विवाद में सफलता मिलती है। रिश्तों में यदि दरार आ गई है और रिश्तों में फिर से मिठास लाना हो तो भगवान नृसिंह को मक्के का आटा चढ़ाना चाहिए। बीमारी से निजात पाने के लिए भगवान नृसिंह को चंदन का लेप लगाना चाहिए। नृसिंह जयंती के दिन इस दिन सुबह स्नान के बाद भगवान नृसिंह के मंदिर में जाकर उनकी पूजा करने का विधान हैं। फूल और चंदन से भगवान की पूजा करें। इसके बाद जो भी आपकी मनोकामना हो उसके अनुसार भगवान को वैसी वस्तु अर्पित करें।
मुक़दमे में विजय प्राप्त करने के लिए भगवान नृसिंह को लाल फूल और लाल रेशमी धागा अर्पित करें। घी का चौमुखी दीपक जलाएं और इस मंत्र का जाप करें। 'ओम नृ नृसिंहाय शत्रु भुज बल विदीर्णाय स्वाहा' पूजा के बाद लाल रेशमी धागे को कलाई में बांध लें। कर्ज से मुक्ति पाने के लिए अपनी उम्र के बराबर भगवान नृसिंह को लाल फूल अर्पित। लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र का पाठ करें। ऐसा करने से कर्ज की समस्या का समाधान होगा। आरोग्य, लंबी आयु और सर्वकल्याण के लिए भगवान नृसिंह को पीली वस्तुओं का भोग लगाएं और इस मंत्र का 108 बार जाप करें।
उग्रं वीरं महाविष्णुम, ज्वलन्तं सर्वतोमुखम।
नृसिंहम भीषणं भद्रं, मृत्योर्मृत्यु नमाम्यहम।।

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