Friday, 20 December 2019

"यूनिफॉर्म्ड वीमेन इन प्रिजन्स एडमिनिस्ट्रेशन" दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस सम्पन्न



दो दिवसीय 'यूनिफार्म्ड वीमेन इन प्रिजन्स एडमिनिस्ट्रेशन' नेशनल कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह में कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की बेहतरी के लिये हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कॉन्फ्रेंस में हुए विचार-विमर्श और प्राप्त सुझावों का परीक्षण कर उन्हें अपनाने के यथासंभव प्रयास किये जायेंगे। मध्यप्रदेश जेल एवं सुधारात्मक सेवाएँ और पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'जेल प्रशासन में वर्दीधारी महिलाएँ'' विषय पर इस द्वितीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देश-भर के लगभग 21 राज्यों के 250 प्रतिभागी, जेलों के वार्डन से लेकर महानिरीक्षक स्तर की वर्दीधारी महिला अधिकारी-कर्मचारी, गैर-सरकारी संगठनों के सदस्य, शैक्षणिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
सम्मेलन में जेल विभाग में कार्यरत वर्दीधारी महिला अधिकारियों-कर्मचारियों के लिये लिंगभेद मुक्त कार्य-स्थल/वर्दीधारी महिलाओं की कार्य-स्थल पर चुनौतियाँ, वर्दीधारी महिला अधिकारियों के लिये कार्य और पारिवारिक जीवन में संतुलन/वर्दीधारी महिला जेल अधिकारियों को जेल के मुख्य कार्यों/दायित्वों से जोड़ना, कार्य-स्थल से जुड़ी समस्याएँ तथा कार्य निष्पादन पर चर्चा हुई।
दो दिवसीय सम्मेलन के 6 सत्रों में जेल विभाग की वर्दीधारी महिलाओं से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। इस सम्मेलन में 10 प्रस्ताव पारित किये गये। इनमें वर्दीधारी महिलाओं को प्रतिमाह दो दिवस का विशेष अवकाश, केन्द्रीय विद्यालयों में पुलिस एवं जेल विभाग के कर्मचारियों के बच्चों के लिये विशेष कोटा, महिलाओं के यूनिफार्म पैटर्न में बदलाव, वेतन में विसंगतियों को दूर करना, उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला कर्मचारियों को ज्योति अवार्ड, कारागार सेवाओं में आरक्षण, जेलों में फिटनेस सेंटर, जेलों पर मूलभूत सुविधाओं में बढ़ोत्तरी संबंधी प्रस्ताव शामिल हैं।
सम्मेलन में पश्चिम बंगाल की रिटायर्ड अतिरिक्त जेल महानिरीक्षक विचित्रा भट्टाचार्य और कर्नाटका की उप अधीक्षक वशीरा बेगम की सफलता की कहानी प्रस्तुत की गई। इस मौके पर एडीजी रेल अरुणा मोहन राव, तमिलनाडु के एडीजी आभाष कुमार, जेल महानिदेशक  संजय चौधरी, आई.जी. पवन श्रीवास्तव और आई.जी. तजेन्दर सिंह लूथरा मौजूद थे। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को स्मृति-चिन्ह दिये गये और राष्ट्रगान हुआ।

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