Thursday, 22 August 2019

मुख्यमंत्री के जन्म दिवस पर पुरखों के सपने होंगे साकार


मुख्यमंत्री बघेल के नेतृत्व में पुरखों के सपनों को साकार करने के लिए तेजी से फैसले लिए जा रहे हैं। जनता की नब्ज को पहचानते हुए मुख्यमंत्री ने हाल के 6-7 माह में प्रदेश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए कई निर्णय लिए हैं। औद्योगिक वातावरण को बदलने के लिए खनिज आधारित उद्योगों के स्थान पर कृषि आधारित नए उद्योगों की स्थापना के लिए पहल की जा रही है, इससे जहां स्थानीय स्तर पर नए रोजगार के अवसरों का सृजन होगा वहीं किसानों और वनाचलों में वनोपज का संग्रहण करने वाले परिवारों की आमदनी में वृद्धि होगी।  नई सरकार के गठन और उनके द्वारा लिए जा रहे नए फैसलों और कदमों से नई उम्मीदें जागी है। किसान हितैषी फैसलों से प्रदेश में विकास, विश्वास और उत्साह का नया वातावरण बना है। लोगों की क्रय शक्ति बढ़ने के साथ ही उनका मान-सम्मान भी बढ़ा है।
मुख्यमंत्री के किसान पुत्र होने और अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मिले प्रशासनिक अनुभव का लाभ प्रदेश में विभिन्न विभागों के संचालन और नीति निर्धारण में मिल रहा है। छत्तीसगढ़ी भाषा में लोगों को सम्बोधित करना उनकी खासियत है। उनकी भाषा में छत्तीसगढ़ की मिठास और अपनी माटी की सौंधी महक मिलती है। विपक्ष में रहते हुए उन्होंने किसानों के मुद्दों पर हमेशा पैनी नजर रखी। अपने कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ के पुरखों को आदर और सम्मान देना नहीं भूलते। आधुनिक ज्ञान विज्ञान में उनकी गहरी रूचि है। वे नदी-नालों के पुनर्जीवन के लिए आधुनिक तकनीक पर विशेष बल देते हैं। श्री बघेल विद्यार्थियों को हमेशा वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीकों के उपोग के प्रति सजग रहने की समझाईश देते हैं । उनका मानना है कि हमारे देश ने आचार्य चरक, सुश्रुत, आर्यभट्ट और नागार्जुन जैसे महान वैज्ञानिक दिए लेकिन उन्नीसवीं सदी तक हम ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में पिछड़ गए। इसका मुख्य कारण हमने सवाल पूछना बंद कर दिया है। उनका मानना है कि आज की ज्वलंत समस्याओं के समाधान के लिए हमें शोध पर ध्यान देना होगा।
       मुख्यमंत्री बघेल नें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ग्राम और ग्रामीणों के विकास की अवधारणा के अनुरूप ग्रामीण जनजीवन को खुशहाल बनाने के लिए छत्तीसगढ़ की चार चिन्हारी नरवा, गरवा घुरवा बाड़ी को आधार बनाकर सुराजी गांव योजना शुरू की है। छत्तीसगढ़ की सतरंगी संस्कृति पर आम जनता को स्वाभिमान और गर्व की अनुभूति जगाने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा हरेली, तीज , छठ, मां कर्मा जयंती और विश्व आदिवासी दिवस पर सामान्य अवकाश की घोषणा से लोगों में उत्साह का वातावरण है। ग्रामीण जनजीवन पर इसका खासा असर दिख रहा है। हाल में ही एक अगस्त को नए स्वरूप में हरेली तिहार मनाया गया। जिसमें छत्तीसगढ़ की संस्कृति की बानगी देखते बनती थी। लोगों में ऐसा स्वस्फूर्त उत्साह पहली बार दिखा। इस उत्साह मेें मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के सभी मंत्री शामिल हुए।
       गांवों के लोगों को रोजगार और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ के गांवों में पौनी पसारी योजना से गांवों में परम्परागत रूप से लोहार, धोबी, और नाई आदि का काम करने वाले लोगों के लिए नगरीय क्षेत्रों में बाजार का निर्माण करने से इन परम्परागत रूप से काम करने वालों को सीधा फायदा होगा। जन चौपाल-भेंट मुलाकात के जरिए आम जनता से नजदीकी बनाए रखने की कोशिश की जा रही है इन मुलाकातों में लोगों से फीड बेक लेने के साथ ही उनकी समस्याओं और तकलीफें भी सुनी जा रही हैं।
 

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