Saturday, 20 July 2019

बच्चों को सायबर अपराध से सुरक्षित करने और अपराध अन्वेषण के तरीकों पर चार दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न


समय के साथ अपराध करने के तरीकों में परिवर्तन आया है। नये साइबर युग में कम उम्र के बच्चे भी मोबाइल हाथ में लेने लगे है। साथ ही आज के बच्चे बड़े बुजुर्गाे को भी मोबाइल चलाना और सोशियल मीडिया में एक्टिव रहना सिखा रहे है, परन्तु चाहे बच्चे हों या बड़े वे इस नये आयाम में अनदेखे खतरों से वाकिफ नहीं है। सायबर अपराध कैसे धीरे-धीरे उन्हें अपने गिरफ्त में ले लेता है पता ही नहीं चलता लेकिन जब तक अपराध का पता चलता है बहुत देर हो चुका होता है।
    सायबर अपराध से बचना एवं अपराध घटित हो जाये तो उस पर अनुसंधान करना आवश्यक है, सायबर अपराध के अनुसंधान को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 20 पुलिस अधिकारी को ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। सायबर पीस फाउंडेशन, यूनिसेफ, आरंभ एन जी ओ के साथ छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा बच्चों को सायबर अपराध से सुरक्षित करने एवं अपराध अन्वेषण के तरीको पर 17 जुलाई से 20 जुलाई तक चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें बच्चों के साथ होने वाले सायबर अपराध संबंधित कानून, सायबर अपराध एवं चुनौतियां, सायबर अपराध से संबंधित डिजीटल साक्ष्य एकत्र करना एवं उन्हें उचित ढंग से उपयोग करना, बच्चों (बालक-बालिका) के साथ होने वाले अपराध, बच्चों में होने वाले शारीरिक एवं मानसिक बदलाव एवं उनकी परेशानियों को समझना एवं काउंसलिंग इत्यादि विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
    प्रशिक्षण में श्री आर के विज, विशेष पुलिस महानिदेशक द्वारा अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन दिया गया। उन्होंने सायबर कानून, डिजिटल साक्ष्य, उसकी उपयोगिता एवं सायबर प्रोटेक्शन में व्याख्यान के साथ-साथ पुलिस विभाग में संवेदना की आवश्यकता पर जोर दिया। 
    चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में मनीषा ठाकुर रावटे, दीपमाला कश्यप, उदयन बेहरा, कपिल चंद्रा, रवि सिंह बिसेन, निशा टिकरिहा, अपराजिता सिंह राणा, राजश्री मौर्य एवं अन्य अधिकारियों के साथ सायबर पीस फाउंडेशन से विनीत सिंह, सायबर एक्सपर्ट नरसिम्हा राव  पुर्णेन्दु, लीगल एडवाजर उरविल अभय, यूनिसेफ प्रतिनिधि प्रियंका और निजी संस्था के प्रतिनिधि उमा सुब्रमणियम एवं शैफाली उपस्थित थे।

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