Thursday, 7 February 2019

छत्तीसगढ़ बजट : वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट को लेकर किसान, कृषि छात्रों सहित कारोबारियों को काफी उम्मीदें

छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 8 फरवरी से प्रारंभ होने जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपनी सरकार का पहला बजट पेश करेंगे। एक माह तक चलने वाले बजट सत्र की पूरी तैयारी कर ली गई है। प्रदेश के नए वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट को लेकर किसान, कृषि छात्रों सहित कारोबारियों को काफी उम्मीदें हैं। किसान संगठनों का कहना है कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा 16 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है। हर खेत को पानी, बिजली और रास्ता मिले तभी किसान उन्नाति कर पाएंगे। इनके बिना तो अन्य योजनाओं का उचित लाभ भी नहीं मिल पाएगा। नवाचारी और औषधीय फसलों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, तभी आय बढ़ेगी। कृषि विशेषज्ञ कहते हैं कि कृषि की लागत को महसूस करके उत्पादन और लाभ को बढ़ाने वाले बजट की जरूरत है। फसलों के मूल्य का सही आकलन तभी होगा, जब बेहतर मार्केटिंग और प्रोसेसिंग की व्यवस्था हो। सरकार पंचवर्षीय ठोस योजना लाए। सिर्फ नरवा, गरवा, घुरवा, बारी…की जुमलेबाजी से प्रदेश का विकास नहीं होगा। किसानों को मिल रही योजना की सही तरह से निगरानी होनी चाहिए। अधिकारी के भरोसे योजना नहीं चल सकती है। अनुदान की मौजूदा व्यवस्था को बदलने की दरकार है।

औषधीय फसलों को मिले बढ़ावा
अखिल भारतीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक तथा सेंट्रल हर्बल एग्रो मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि भारत में छोटे और मंझोले किसानों को लाभ नहीं मिलता। छोटे और बड़े किसान के बीच अनुदान का भेदभाव खत्म होना चाहिए। सिर्फ नरवा, गरवा, घुरवा, बारी… की बात कहकर किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत नहीं किया जा सकता। पांच वर्ष के लिए टिकाउपन योजनाएं बनें। नवाचारी और औषधीय फसलों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, तभी आय बढ़ेगी। भारत में चार हजार से अधिक औषधियां होने के बावजूद निर्यात में पिछड़े हैं। खेती हर्बल की ओर बढ़ रही है। खेती को नवाचार व प्रोसेसिंग से जोड़ना होगा। प्रदेश में सिंचाई का रकबा मात्र 16 प्रतिशत है, इसे भी बढ़ाने की जरूरत है।

कर्ज मुक्त कृषि व्यवस्था बने
कर्ज माफी किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं है। बेहतर होगा कि किसानों के लिए सरकार कर्ज मुक्त कृषि व्यवस्था को अमल में लाए। किसानों को खेती के लिए कर्ज लेने से बचाया जाए। भारतीय किसान संघ के उपाध्यक्ष व किसान टिकेंद्र कुमार चंद्राकर ने कहा कि इस बजट को बनाने से पहले राज्य या केंद्र सरकार को कृषि की लागत महसूस करनी चाहिए। इसके अभाव में लगातार कर्ज लेने के बाद भी किसानों को राहत नहीं मिल रही है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाना चाहिए। ट्रैक्टर या शेड बनाने के लिए सब्सिडी है, लेकिन छोटे किसानों को फायदा नहीं मिल रहा है।

कृषि यंत्र देने के लिए बने प्रावधान
इंदिरा गांधी कृषि विवि के प्रोफेसर डॉ. केपी वर्मा ने कहा कि किसानों को कस्टर हायर बेसिस में कृषि यंत्र देने के लिए बजट में प्रावधान होना चाहिए। खेतों की चकबंदी कर रजिस्ट्री खर्च कम करने का प्रावधान हो। ब्लॉक स्तर पर कृषि यंत्र केंद्र खोले जाएं। यहां कृषकों को आवश्यक उपकरण कम किराए पर उपलब्ध कराया जाए। औजार, ट्रैक्टर, सीड ड्रिल, डिस्क हैरो, रीपर, मोल्डवोड प्लाऊ, कल्टिवेटर आदि उपकरण यहां दिए जाएं। कृषकों को स्वतः बीज उत्पादन एवं बीज भंडारण के लिए प्रेरित किया जाए।

योजनाओं का छोटे-मंझोले किसानों को मिले फायदा
भारतीय किसान संघ के मीडिया प्रभारी नवीन शेष का कहना है कि किसान को कर्जमाफी नहीं चाहिए। अभी तक जो योजनाएं हैं, उनसे सिर्फ बड़े किसानों को फायदा होता है। अनुदान का फायदा असिंचित किसानों को नहीं हो रहा है। शेड बनाने के लिए 27 लाख की लागत में सरकार 15 लाख सब्सिडी देती है, लेकिन इस योजना का लाभ तो छोटे और मंझोले किसान नहीं उठा पाते हैं। प्रति एकड़ आठ हजार रुपये का अनुदान देकर भेदभाव ही खत्म कर देना चाहिए। इससे किसानों को राहत मिलेगी। रबी की फसलों को लेकर भी नीति बने।

जलवायु विविधता पर तैयार हो योजना

इंदिरा गांधी विवि के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जीके दास का कहना है कि किसानों को बंटाईदार के हिसाब से अनुदान मिलना चाहिए। भूमि स्वामी और बंटाईदार के हितों को सुरक्षित रखने के साथ कम जमीन में भूमि संसाधन का अधिकतम और लाभप्रद उपयोग हो, इसके लिए जैव विविधता और जलवायु विविधता के आधार पर योजना बननी चाहिए। फसल के आधार पर भूति तय किया जाए। साथ ही नवाचार की नई फसलों को बढ़ावा मिले। नदियों, तालाब, कुआं, ट्यूबवेल आदि में वाटर रिचार्जिंग को लेकर काम करने की जरूरत है। जल की उपलब्धता जहां कम हो वहां ड्रिप एरीगेशन सिस्टम पर काम होना चाहिए।

समूह खेती के लिए मिले सब्सिडी

इंदिरा गांधी कृषि विवि के प्रोफेसर डॉ. बीसी जैन ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में जैसे रायगढ़ में अदरक का उत्पादन अत्यधिक है। कहीं टमाटर का उत्पादन अधिक हो रहा है, इसलिए उनके निर्यात के लिए प्राधिकरण बनना चाहिए। जलवायु परिवर्तन के आधार पर फसल चक्र परिवर्तन हो। समूह खेती को बढ़ावा दिया जाये। सरकार किसानों को सब्सिडी प्रदान करे। उन्हें मृदा के सैंपल लेने के लिए प्रशिक्षित किया जाए।

स्टूडेंट्स ने दिए सुझाव
परती भूमि के लिए हो बोर्ड,जंगल में लगवाएं औषधीय पौधे
राज्य में 20 प्रतिशत परती भूमि है, जिसे उपजाऊ बनाने की जरूरत
जैविक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता
प्याज, टमाटर के लिए हो फूड प्रोसेसिंग और कोल्ड स्टोरेज
परती जमीन को एग्रीकल्चर छात्रों को लीज के रूप में दिया जाए
नवाचार के तहत कृषि कार्य शुरू करने, मार्केटिंग स्तर पर उन्हें प्रशिक्षित करने की व्यवस्था शुरू हो
कृषि में ग्रेजुएट छात्रों के लिए बेहतर कार्य योजना तैयार करें

ये मिले विशेषज्ञों से अहम सुझाव
रोग व कीटों से खराब फसलों पर भी किसानों को मुआवजे की व्यवस्था होनी चाहिए
खाद में 50 प्रतिशत की छूट, लाभकारी सूक्ष्म जीवों के उत्पादन में छूट हो
धान की खरीदारी पूरे वर्षभर होनी चाहिए, रबी फसलों को लेकर भी नीति बने
बस्तर, सरगुजा संभाग में जैविक खेती को बढ़ावा देकर यहां विशेष कृषि जोन बने
कृषि यांत्रिकी को बढ़ावा देने के लिए कृषि यंत्र कम रेट पर, किराए पर दिए जाएं
फसल बीमा को सरलीकृत करते हुए ग्राम को इकाई बनाकर मौसम मापक यंत्र स्थापित कर ग्रामवार क्षति का आकलन हो।
फूड प्रोसेसिंग प्लांट, अधिक टमाटर उत्पादन वाले क्षेत्र में जूस बनाने की फैक्टरी लगे
गन्ने का समर्थन मूल्य व सब्जी-भाजी में भी समर्थन मूल्य देने का प्रावधान हो
सुगंधित धान, जैविक धान की खेती करने वाले किसानों को विशेष बोनस देते हुए विपणन के लिए सहायता राशि दी जाए ।
मनरेगा को कृषि से जोड़ते हुए वृहद योजना बनाई जाए, जिसमें बागवानी, औषधीय, सुगंधित फसलों की खेती को सम्मिलित किया जाए।
भंडारण के लिए कोठी की व्यवस्था को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए।

फैक्ट फाइल
करीब 36 लाख किसान प्रदेश में कर रहे हैं खेतीबाड़ी
13 हजार 480 करोड़ रहा 2018-19 का कृषि बजट, जो 29 प्रतिशत अधिक रहा
12.50 लाख करीब किसान खरीफ और रबी फसल के लिए लेते हैं कर्ज
18 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ सिर्फ धान का उत्पादन मानती है सरकार

चुनावी घोषणाओं पर अमल
समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी में 2500 रुपये प्रति क्विंटल में करने के साथ किसानों का कर्ज माफ किया गया।
तीन महीने तक चली धान खरीदी में कुल 80.36 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया । अब तक की यह रिकार्ड खरीदी है।
चिटफंड कंपनियों के एजेंटो पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और निवेशकों का पैसा वापस दिलाने की बात पर सहमति।
उद्योगों के लिए ली गई किसानों की ऐसी भूमि, जिनका उपयोग नहीं किया गया उसे किसानों को लौटाने का निर्णय।
जिला सहकारी बैंक का अपेक्स बैक में विलय नहीं

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