Monday, 7 May 2018

कांग्रेस की याचिका चीफ जस्टिस पर महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस खारिज करने के खिलाफ कल सुनवाई

कांग्रेस की याचिका चीफ जस्टिस पर महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस खारिज करने के खिलाफ कल सुनवाई

राज्यसभा में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस खारिज किए जाने के फैसले को 2 कांग्रेस सांसदों ने चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर 5 जजों की संविधान पीठ का गठन किया है, जो कल इस याचिका पर सुनवाई करेगी। इस बेंच में जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रामना, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एके गोयल शामिल हैं। बता दें कि 23 अप्रैल को उपराष्ट्रपति ने विपक्ष के सात दलों के सांसदों के हस्ताक्षर वाले नोटिस को खारिज कर दिया था।
सभापति के पास खारिज करने का विकल्प नहीं- कांग्रेस सांसद
- 2 राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा और अमी याग्निक ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि उपराष्ट्रपति और सभापति वेंकैया नायडू के पास इसे खारिज करने का विकल्प नहीं है। उन्हें जस्टिस मिश्रा के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए एक कमेटी बनाना चाहिए थी।
- सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि नोटिस को खारिज करने की अपील की अर्जेंट लिस्टिंग होनी चाहिए। चूंकि, ये मामला चीफ जस्टिस के खिलाफ है, इसलिए सबसे वरिष्ठ जज को लिस्टिंग करने के निर्देश देना चाहिए।
10 पेज के फैसले में उपराष्ट्रपति ने बताए थे नोटिस खारिज करने के आधार
- उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने अपने 10 पेज के फैसले में कहा था- "नोटिस में चीफ जस्टिस पर लगाए गए आरोपों को मीडिया के सामने उजागर किया गया, जो संसदीय गरिमा के खिलाफ है। साथ ही कहा गया है कि उन्होंने तमाम कानूनविदों से चर्चा के बाद पाया कि यह प्रस्ताव तर्कसंगत नहीं है।"
- "सभी पांच आरोपों पर गौर करने के बाद ये पाया गया कि ये सुप्रीम कोर्ट का अंदरूनी मसला है। ऐसे में महाभियोग के लिए ये आरोप स्वीकार नहीं किए जा सकते।"
- सभापति ने बताया कि विपक्षी दलों के नोटिस को अस्वीकार करने से पहले उन्होंने कानूनविदों, संविधान विशेषज्ञों, लोकसभा और राज्यसभा के पूर्व महासचिवों, पूर्व विधिक अधिकारियों, विधि आयोग के सदस्यों और न्यायविदों से सलाह-मशविरा किया।
- उन्होंने पूर्व अटॉर्नी जनरलों, संविधान विशेषज्ञों और प्रमुख अखबारों के संपादकों के विचारों को भी पढ़ा।
कांग्रेस ने सीजेआई पर 5 आरोप लगाए थे
- कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सभापति को सौंपे सांसदों के नोटिस का हवाला देते हुए पांच आरोप बताए थे। इनके आधार पर ही चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस लाया गया था।
1) पहले आरोप के बारे में सिब्बल ने कहा था, ‘"हमने प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट मामले में उड़ीसा हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज और एक दलाल के बीच बातचीत के टेप भी राज्यसभा के सभापति को सौंपे हैं। ये टेप सीबीआई को मिले थे। इस मामले में चीफ जस्टिस की भूमिका की जांच की जरूरत है।’’
2) "एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज के खिलाफ सीबीआई के पास सबूत थे, लेकिन चीफ जस्टिस ने सीबीआई को केस दर्ज करने की मंजूरी नहीं दी।’’
3) "जस्टिस चेलमेश्वर जब 9 नवंबर 2017 को एक याचिका की सुनवाई करने को राजी हुए, तब अचानक उनके पास सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से बैक डेट का एक नोट भेजा गया और कहा गया कि आप इस याचिका पर सुनवाई नहीं करें।’’
4) "जब चीफ जस्टिस वकालत कर रहे थे तब उन्होंने झूठा हलफनामा दायर कर जमीन हासिल की थी। एडीएम ने हलफनामे को झूठा करार दिया था। 1985 में जमीन आवंटन रद्द हुआ, लेकिन 2012 में उन्होंने जमीन तब सरेंडर की जब वे सुप्रीम कोर्ट में जज बनाए गए।’’
5) "चीफ जस्टिस ने संवेदनशील मुकदमों को मनमाने तरीके से कुछ विशेष बेंचों में भेजा। ऐसा कर उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया।’’

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