Monday, 14 May 2018

कुपोषण के खिलाफ जंग में समाज की भागीदारी बहुत जरूरी : केन्द्रीय मंत्री तोमर


कुपोषण के खिलाफ जंग में समाज की भागीदारी बहुत जरूरी : केन्द्रीय मंत्री तोमर

केन्द्रीय पंचायत राज, ग्रामीण विकास और खनन मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि भौतिकवाद के कारण प्राकृतिक संसाधनों के साथ वर्षों खिलवाड़ हुआ है। इसी कारण पोषण के क्षेत्र में असंतुलन पैदा हो गया है। समाज में पोषण के प्रति जागरूकता बहुत जरूरी है। महज सरकार के प्रयास नाकाफी साबित होंगे। श्री तोमर आज भोपाल में पोषण संबंधी तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ कर रहे थे।
श्री तोमर ने न्यूट्रीशन स्मार्ट विलेज की सराहना करते हुए कहा कि 313 ग्रामों से प्रारंभ हुई इस छोटी-सी शुरूआत का विस्तार प्रदेश के सभी गाँवों में होगा और गाँव स्वयं पोषण में आत्म-निर्भर बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि परम्परागत कृषि और खाद्यान्न पद्धति में आये बदलावों के परिणाम स्वरूप पोषण में कमी की स्थिति बनी है। इसके निराकरण के लिए विभिन्न विभागों के आपसी सहयोग से आरंभ की गई गहन और विशेषज्ञता पूर्ण विचार-विमर्श श्रृंखला के निष्कर्ष निश्चित ही कारगर सिद्ध होंगे। श्री तोमर ने कार्यशाला की अनुशंसाओं को केन्द्र की ओर से हर संभव समर्थन देने का आश्वासन दिया। पोषण जागरूकता के शंखनाद के प्रतीक स्वरूप इस अवसर पर अतिथियों को शंख भेंट किये गये।
महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि कृषि व्यवस्था को बाजारवाद से बचाने की जरूरत है। फसलें केवल बेचने के लिये नहीं लें, बल्कि जो खाते हैं, वह उगायें और जो उगायें वह खायें। इस संदर्भ में उन्होंने कृष्ण और कंस के संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि कृष्ण चाहते थे कि बृज में उत्पादित दूध पर पहला अधिकार बृज के बच्चों का हो और शेष दूध ही मथुरा जाना चाहिए। कंस बृज में उत्पादित पूरे दूध पर अपना अधिकार जमाना चाहता था। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि खेत और गाँव से बेर, कबीट, इमली, आँवला, सुरजना के नैसर्गिक पेड़ गायब हो रहे हैं। यह खाद्य विविधता की समाप्ति का संकेत हैं, इनको बचाना बहुत जरूरी है। इससे सहज-सुलभ और मुफ्त में मिलने वाले पोषक तत्व लोगों से दूर हो रहे हैं। उन्होंने मोटे अनाज (न्यूट्री सीरियल्स) को सार्वजनिक वितरण प्रणाली में शामिल करने के निर्णय के लिए भारत सरकार का आभार व्यक्त किया।
श्रीमती चिटनिस ने पोषण संवेदी कृषि और पोषण जागरूकता के विस्तार के लिए आरंभ हुए प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि फरवरी 2016 में चित्रकूट में इस विचार का बीजारोपण हुआ था। इस दिशा में भोपाल और शिलांग सहित कई स्थानों पर कार्यशालाएँ आयोजित की गईं तथा प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों के एक-एक ग्राम को न्यूट्रीशन स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित किया गया। उन्होंने कहा कि गाँव तभी पोषण आहार में स्वावलंबी होंगे, जब वहाँ की मिट्टी सुपोषित होगी। इन गाँवों का न्यूट्रीशन ऑडिट कराने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि हम न्यूट्रीशन स्मार्ट नागरिक की अवधारणा पर कार्य कर रहे हैं। तिरंगा थाली के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बाजार की ताकतों के प्रभाव में कमी, परम्परागत ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय से हम पोषण में कमी की समस्या को दूर करने में सफल होंगे।
प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास श्री जे. एन. कंसोटिया ने पोषण जागरूकता के विस्तार की आवश्यकता बताई। शुभारंभ अवसर पर यूनीसेफ के सीएफओ श्री माइकल जूमा और न्यूट्रीशन प्रमुख श्री अर्जन वाग्ट, दीनदयाल शोध संसाधन दिल्ली के श्री अतुल जैन, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, अटारी जबलपुर के संचालक डॉ. श्री अनुपम मिश्र, कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलपति डॉ. एस. के. राव तथा विषय-विशेषज्ञ उपस्थित थे।
अतिथियों का स्वागत केले के छिलके से तैयार गमछा और अलसी के फाइबर से बनी कोटी भेंट कर किया गया। इस अवसर पर पोषण पंचांग का विमोचन भी हुआ। पोषक तत्वों और विभिन्न स्तर पर पोषण जागरूकता पर संचालित गतिविधियों पर केन्द्रित प्रदर्शनी लगायी गई है। कार्यशाला में 15 और 16 मई को विभिन्न तकनीकी सत्र होंगे, जिनमें खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा, ग्राम स्तरीय वाणिज्य व्यापार गतिविधियों, ग्राम स्तरीय समूहों के क्षमता विकास तथा प्रभावी नीति निर्धारण और क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श होगा।

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