Sunday, 11 March 2018

7 करोड़ बनाम 50 लाख.......

7 करोड़ बनाम 50 लाख.......

आलोक गोस्वामी-खेल विश्लेषक

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सीओए (कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स )ने क्रिकेट खिलाड़ियों के नये कॉन्ट्रैक्ट की घोषणा कर दी।बीसीसीआई के नये कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम के अनुसार टीम इंडिया के खिलाड़ियों का वेतन अब तीन गुना ज्यादा बढ़ गया है।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के ठीक एक दिन पहले बीसीसीआई ने टीम इंडिया के लिए यह कांट्रेक्ट सिस्टम लागू कर दिया है। लेकिन भारतीय महिला टीम के विश्व कप के फाइनल तक पहुंचने और टीम के देश और विदेश में लगातार अच्छे प्रदर्शन करने के बावजूद, उनको मिलने वाले वेतन में पुरुष खिलाड़ियों की अपेक्षा बहुत ज्यादा अंतर रखा गया है| हालांकि इस सिस्टम में  भारतीय पुरुष टीम और भारतीय महिला टीम के लिए एक नया ग्रेड शुरू किया गया है।भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम की ग्रेडिंग में ए+ जोड़ा गया है जबकि महिला टीम में ग्रेड सी का जुड़ाव हुआ है।बीसीसीआई ने नया ग्रेड सिस्टम बनाया है, जिसमें पुरुष खिलाड़ियों को ग्रेड A+,  A,  B,और ग्रेड C की व्यवस्था की गई है। पहले वाले कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में ग्रेड A+ नहीं होता था। अब ग्रेड A+ में आने वाले खिलाड़ियों को सालाना 7 करोड़, ग्रेड A के खिलाड़ियों को 5 करोड़, ग्रेड B के खिलाड़ियों को 3 करोड़ और ग्रेड C के खिलाड़ियों को  1 करोड़ रुपये मेहनताने के रूप में मिलेगा। पहले ग्रेड A के खिलाड़ियों को 2 करोड़, ग्रेड B के खिलाड़ियों को 1 करोड़ और ग्रेड C के खिलाड़ियों को 50 लाख रुपये मेहनताने के रूप में मिलते थे।मतलब पुरुषों की टीम के शीर्ष खिलाड़ियों को अब प्रति वर्ष 7 करोड़ रुपये दिये जायेंगे, जबकि उसी श्रेणी में महिलाओं को प्रति वर्ष मात्र 50 लाख रुपए मिलेंगे। यानी सबसे ऊंची श्रेणी की महिला खिलाड़ी को अब भी सबसे निचले ग्रेड के पुरुष खिलाड़ी से सालाना आधी राशि ही मिलेगी।बीसीसीआई ने महिलाओं में विश्वकप स्टार मिताली राज, झूलन गोस्वामी, हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंदाना को शीर्ष स्तर की श्रेणी में रखा है।उनका वार्षिक अनुबंध 50 लाख रुपये का होगा। बी ग्रेड में सालाना अनुबंध 30 लाख रुपये होगा। वहीँ अब महिलाओं के लिऐ सी श्रेणी भी होगी जिसमें शामिल खिलाड़ियों का वार्षिक अनुबंध दस लाख रुपये का होगा।बीसीसीआई दवारा तय किये आंकड़ों के अनुसार शीर्ष  भारतीय पुरुष खिलाड़ियों को महिलाओं की तुलना में 14 गुना ज्यादा भुगतान किया जायेगा।वैसे तो बीसीसीआई का नया कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम घोषणा के बाद से ही तमाम सवालों के घेरे में है लेकिन बड़े अचरज की बात यह है  कि सिवाय खेल प्रेमियों के अब तक किसी ने भी महिला खिलाड़ियों को मिलने वाली राशि पर सवाल उठाना उचित  नहीं समझा है।सभी लोग इस बात की समीक्षा करने में लगे हुए हैं कि किस पुरुष खिलाड़ी को कौन से ग्रेड में शामिल किया जाना चाहिए था।यह बात सच है कि पुरुषों की राष्ट्रीय टीम महिला से अधिक मैच खेलती है और बोर्ड के लिए अधिक विज्ञापन राजस्व भी वह लेकर आती है।लेकिन इतनी बड़ी राशि का अंतर के लिए इसे पैमाने के रूप में नहीं माना जाना चाहिए,वेतन और पारिश्रमिक खिलाड़ियों कौशल के आधार पर ही होना चाहिए। चाहे वह पुरुष खिलाड़ी हो या फिर महिला खिलाड़ी ही क्यों न हो। हमारे देश मे जहां आजकल 'बेटी पढ़ाओ,बेटी बढ़ाओ' जैसे अभियान को बढ़ावा दिया जा रहा है।वहीं खेल को अपना भविष्य बनाने और देश के लिए खेलने वाली महिला खिलाड़ियों के प्रति बीसीसीआई की इस तरह की भेदभाव पूर्ण नीति निश्चित तौर पर देश की महिला क्रिकेट खिलाड़ियों का मनोबल कमजोर कर सकती है।

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