Sunday, 11 February 2018

अपने भीतर छुपी प्रतिभा को अपनी ताकत बनाएँ दिव्यांगजन : राष्ट्रपति कोविंद


अपने भीतर छुपी प्रतिभा को अपनी ताकत बनाएँ दिव्यांगजन : राष्ट्रपति कोविंद


राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने दिव्यांगजनों से कहा है कि अपनी शारीरिक कमजोरी को जिंदगी पर हावी न होने दें। अपनी प्रतिभा को पहचानें। यही प्रतिभा जिंदगी में आगे बढ़ने का आत्मबल प्रदान करेगी। राष्ट्रपति श्री कोविंद ने आज ग्वालियर में आयोजित 'नि:शुल्क सहायक उपकरण वितरण समारोह' को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दिव्यांगों से कहा कि उपकरण सहयोग के लिये हैं, उन्हें सहारा न बनाएँ। अपनी प्रतिभा और छिपी ताकत को जगाएँ, फिर ये धरती और आसमां आपका होगा।
राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से दिव्यांगों को सहायक उपकरण मुहैया कराने की योजना समग्र कल्याण की दिशा में समावेशी शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा के लिये किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि दिव्यांग एवं वृद्धजन को सरकार द्वारा अत्याधुनिक सहायक उपकरण मुहैया कराए जा रहे हैं। सरकार इस लक्ष्य के साथ काम कर रही है कि कोई भी दिव्यांग बगैर सहायता के न रहे। सरकारी एवं निजी क्षेत्रों में दिव्यांगों के लिये रोजगार के अवसर भी तलाशे जा रहे हैं। भारत सरकार ने नौकरियों में दिव्यांगों के आरक्षण का कोटा तीन प्रतिशत से बढ़ाकर चार प्रतिशत कर दिया है। दिव्यांगों के लिये आरक्षित रिक्त पदों को भरने के लिये भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश में ऐसे कई दिव्यांग है जो दूसरों के लिये प्रेरणा स्त्रोत बने हैं। उन्होंने अण्डर-19 की क्रिकेटर चैन्नई की प्रीति श्रीनिवासन का जिक्र किया। राष्ट्रपति ने कहा कि प्रीति श्रीनिवासन ने सोलफ्री एनजीओ का गठन कर उल्लेखनीय काम किया है। इसी तरह दिव्यांग दीपा मलिक और सज्जन सिंह गुर्जर ने पक्के इरादों की बदौलत अपना और देश का नाम रोशन किया है। राष्ट्रपति ने प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना सुधा चंद्रन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने पैरों की कमजोरी को ताकत बनाकर नृत्य के क्षेत्र में देश ही नहीं, दुनिया में नाम कमाया। इसी तरह दृष्टिबाधित जगदगुरू स्वामी राम भद्राचार्य ने 120 पुस्तकें लिखीं और चित्रकूट में उनके द्वारा संचालित शिक्षण संस्थान से निकले दिव्यांग दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने त्रेतायुगीन ऋषि अष्टावक्र की प्रेरणादायक कहानी सुनाकर दिव्यांगों को प्रोत्साहित किया। राष्ट्रपति ने कहा कि दिव्यांगों की पीड़ा बांटने के लिये ग्वालियर में इस मेगा शिविर का आयोजन सराहनीय पहल है। भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी हरियाणा, मध्यप्रदेश सरकार, जिला प्रशासन एवं एलिम्को तथा इस आयोजन से जुड़ीं धरा फाउण्डेशन सहित अन्य संस्थायें बधाई की पात्र हैं।

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