Sunday, 28 January 2018

नमाज मर्दों का औरत के पीछे पढऩा नाजायज : उलमा

नमाज मर्दों का औरत के पीछे पढऩा नाजायज : उलमा


केरल की कुरान सुन्नत सोसाइटी महासचिव जमीदा जुमा की नमाज अदा कराकर उलमा के निशाने पर आ गई हैं। देश में पहली बार किसी महिला ने जुमा की नमाज अदा कराई। उस नमाज में मर्द भी शामिल थे। उलमा का कहना है कि इस्लाम में औरत मर्दों की इमाम नहीं हो सकती है। इसलिए मर्दों का किसी औरत के पीछे नमाज पढऩा जायज नहीं है। केरल के मलप्पुरम में जमीदा द्वारा सोसाइटी कार्यालय पर अदा कराई गई नमाज में महिलाओं के अलावा करीब 80 पुरुष भी शामिल थे। दारुल उलूम वक्फ के मुफ्ती आरिफ कासमी ने बताया कि जुमा की नमाज सिर्फ मुसलमान मर्दों पर फर्ज है। जिन औरतों ने महिला इमाम के पीछे जुमा की नमाज पढ़ी, उनकी भी नमाज नहीं हुई। क्योंकि औरतों पर जुमा, बल्कि जौहर की नमाज फर्ज है। वरिष्ठ मुफ्ती जाकिर कासमी ने कहा कि औरत के पीछे मर्द की नमाज हरगिज अदा नहीं हो सकती, क्योंकि औरत को इमामत करने का हक नहीं है।
महिलाओं को फुटबाल मैच देखना नाजायज

महिलाओं को बराबरी के अधिकार से रोकने वाले एक ऐसे ही फैसले में सऊदी अरब से आए एक फतवे में औरतों के लिए मर्दों का फुटबाल मैच देखने को हराम करार दिया गया है। इस फतवे पर देवबंदी के उलमा ने भी अपनी सहमति जताई है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने महिलाओं को स्टेडियम में जाकर मैच देखने की इजाजत दी थी। इसके बाद से बड़ी तादाद में महिलाएं मैच देखने स्टेडियम पहुंच रहीं थीं।इसके मद्देनजर सऊदी अरब सरकार में धार्मिक मामलों के पूर्व अध्यक्ष शेख साद अल हजीरी ने एक फतवे में कहा था कि फुटबाल मैच में औरत की नजर फुटबाल खिलाडिय़ों के घुटनों और जांघों पर पड़ती है, जिसे देखना गुनाह है। इस फतवे के बाद इस्लामी हलके में बहस छिड़ गई है।

No comments:

Post a comment

Note: only a member of this blog may post a comment.