Tuesday, 5 September 2017

हमारे स्मार्टफोन को होती है असल में कितनी रैम की जरुरत

हमारे स्मार्टफोन को होती है असल में कितनी रैम की जरुरत



आज के समय में स्मार्टफोन खरीदना भी बेहद मुश्किल है। ऐसा इसलिए क्योंकि स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स की लम्बी लिस्ट से हम असमंजस में पड़ जाते हैं की कौन-सा स्मार्टफोन हमारे लिए बेहतर होगा। इसी के साथ सिर्फ स्पेसिफिकेशन्स अच्छी होने से फोन अच्छा परफॉर्म करेगा ऐसा जरुरी नहीं है। ऐसी ही एक स्पेसिफिकेशन है, जिसे गलत तरीके से समझा जाता रहा है। वह है रैम। ऐसा माना जाता है की फोन की रैम जितनी ज्यादा होगी हैंडसेट की परफॉरमेंस उतनी ही बेहतर होगी। लेकिन क्या असल में आजकल आने वाले 6 या 8 जीबी रैम वाले फोन हमारी जरुरत है? आइए इसके बारे में विस्तार से जानें:

क्या है रैम का काम:
अगर आपके मन में भी यह सवाल पहले आया है तो आप अकेले नहीं है। एंड्रॉयड के लिए CCleaner के निर्माता पिरिफोर्म (Piriform) में प्रोडक्ट हेड विशाल कारा के अनुसार जैसे-जैसे हम स्मार्टफोन में ज्यादा टास्क करते हैं, वैसे हमें फंक्शन्स को सही तरीके से काम करने के लिए रैम की जरुरत होती है। रैम की वजह से ही सभी एप्स एक साथ काम कर पाती हैं।

कितनी रैम होना है सही:
थ्योरी के अनुसार, आपके फोन या लैपटॉप में जितनी ज्यादा रैम होगी, एक समय में उतनी ज्यादा एप्स या प्रोसेस का आप इस्तेमाल कर पाएंगे। हम फोन का इस्तेमाल करते समय गेम भी खेलते हैं, चैटिंग भी करते हैं, सोशल मीडिया अकाउंट पर एक्टिव भी रहते हैं। एक समय में यह सभी काम ठीक से हों, यही रैम का काम है।
इसी के साथ आपके फोन में इन्टॉल गेम या एप रैम में स्टोर होती हैं। जब तक आपकी एप रैम में है, तब तक आप उसे फिर वही से एक्सेस कर सकते हैं, जहां से आपने छोड़ा था।
बैकग्राउंड में एप्स प्रोसेस करती रहें, यह काम रैम के द्वारा ही होता है। जैसे की आपका फोन बैकग्राउंड में आपकी इमेल्स चेक करता है और जैसे ही कोई नया मेल आए तो नोटिफिकेशन भेजता है।
यूजर्स में बढ़ रही मल्टीटास्किंग की आदत:

प्राइमेट लैब्स के जॉन पूले के अनुसार- रैम जितनी ज्यादा हो उतना अच्छा है और रैम ज्यादा होने के कारण परफॉरमेंस पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। पर क्या हमें ज्यादा रैम की जरुरत है?
हमें जितनी रैम चाहिए उसका नंबर दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। एवरेज स्मार्टफोन यूजर प्रति दिन 9 एप्स लॉन्च करता है और एक महीने में तकरीबन 30 भिन्न एप्स का प्रयोग करता है।
पूले ने यह भी कहा की फोन के सॉफ्टवेयर हैवी होते जा रहे हैं। फोन का कैमरा रॉ फॉर्मेट में हैवी फाइल्स शूट करता है और स्क्रीन साइज भी बड़ा हो गया है। इसको सपोर्ट करने के लिए रैम की जरुरत होती है। पर पूले रैम की जरुरत को लेकर उलझन में हैं।

अगर उपलब्ध रैम का आप पूरा इस्तेमाल नहीं कर रहे तो यह आपके फोन की बैटरी को ड्रेन करती है।
आपके फोन में जितनी ज्यादा रैम होगी उतनी ज्यादा पावर होगी और वह उतनी ही अधिक बैटरी का इस्तेमाल भी करेगी। आप किसी एप का प्रयोग करें या नहीं, रैम उतनी ही पावर का इस्तेमाल करेगी।
आसान शब्दों में, अगर आप रैम का उपयोग नहीं कर रहे तो इसका असर आपके फोन की बैटरी पर पड़ेगा।


रैम को फ्री करना सही नहीं:
कारा के अनुसार- यूजर्स को यह गलतफहमी रहती है की रैम को फ्री करना मतलब फोन अच्छा परफॉर्म करेगा। यह मिथ्या लोगों को उस जमाने से है जब पीसी में सीमित मैमोरी का विकल्प रहता था। अब जब मैमोरी या स्टोरेज की कोई कमी नहीं है, तो यह एक मिथ्या भर है। वहीं, स्मार्टफोन के मामले में तो इसका उलट है।

अगर आपको भी बार-बार रैम फ्री करने की आदत है तो इससे आपका फोन तेज नहीं चलेगा बल्कि इसका आपके फोन पर उल्टा प्रभाव पड़ेगा। स्टोरेज से मैमोरी में एप लोड करने की प्रक्रिया में आपके फोन की बहुत पावर कंज्यूम होती है।
पूले के अनुसार- लोगों को रैम को फ्री करना और देखना पसंद है। लेकिन इसके उलट अगर आपकी रैम का प्रयोग हो रहा है तो वो आपके फोन के लिए ज्यादा बेहतर है।
अंत में, आपके स्मार्टफोन में कितनी रैम होनी चाहिए? इस प्रश्न का उत्तर आपकी यूसेज पर निर्भर करता है। वहीं, कुछ लोगों के अनुसार 6 या 8 जीबी रैम फ्यूचर प्रूफ होना है। लेकिन 4GB से ज्यादा रैम आज भी अधिकतर लोगों की जरुरत से ज्यादा या बिना काम की कही जा सकती है।

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