Thursday, 14 September 2017

भारतीय शिक्षा नीति में बदलाव स्वाभाविक है- दीपक जोशी

भारतीय शिक्षा नीति में बदलाव स्वाभाविक है-  दीपक जोशी


भारतीय शिक्षा नीति में समय के साथ बदलाव होना स्वाभाविक है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है कि बदलाव से भारतीय संस्कृति की आत्मा पर कुठाराघात नहीं हो। तकनीकी शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार), स्कूल शिक्षा एवं श्रम राज्य मंत्री  दीपक जोशी ने यह बात सरदार वल्लभ भाई पॉलीटेक्निक कॉलेज में 'भारतीय शिक्षा नीति में बदलाव की आवश्यकता' पर आयोजित संगोष्ठी में कही।  जोशी ने कहा कि हस्ताक्षर अब हिन्दी में करेंगे।

 जोशी ने कहा कि राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय देश का पहला तकनीकी विश्वविद्यालय है, जिसने इंजीनियरिंग की परीक्षा हिन्दी में संचालित करने की शुरूआत की है। उन्होंने कहा कि मौलिक विचार हमेशा मातृभाषा में ही आते हैं। अत: मातृभाषा का हर स्तर पर सम्मान होना जरूरी है।

भारतीय शिक्षा मंडल के राष्ट्रीय संगठन मंत्री  मुकुल कानिटकर ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से शिक्षकों के हाथ में सौंपना चाहिए। जब शिक्षक स्वयं पर गर्व करेंगे तभी समाज उनका सम्मान करेगा। शिक्षकों को एक-दूसरे का सम्मान करने की समझाईश देते हुए  कानिटकर ने कहा कि जापान के विकास का कारण वहाँ शिक्षकों का सम्मान होना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में 3- एच का सूत्र जरूरी है। हृदय (Heart), हाथ (Hand) और दिमाग (Head) का समन्वय होने पर ही बच्चा शिक्षित होगा।  कानिटकर ने कहा कि आई.आई.टी. जैसी कड़ी परीक्षा पास करके मेधावी विद्यार्थी विदेश में नौकरी करने चले जाते हैं। उनकी प्रतिभा का उपयोग देश में होना चाहिए।

संगोष्ठी में आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संतोष चौबे और पॉलीटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशीष डोंगरे ने भी विचार व्यक्त किये। संगोष्ठी में विद्यार्थियों के साथ संवाद भी हुआ। विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान भी किया गया।

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