Friday, 15 September 2017

"स्वच्छता ही सेवा" का संदेश लेकर हर गांव-शहर जायेगें स्वच्छता रथ मुख्यमंत्री द्वारा स्वच्छता‍अभियान का शुभारंभ



शौचालय निर्माण के लिये श्रमदान करेंगे मुख्यमंत्री श्री चौहान

"स्वच्छता ही सेवा" का संदेश लेकर हर गांव-शहर जायेगें स्वच्छता रथ
मुख्यमंत्री द्वारा स्वच्छता‍अभियान का शुभारंभ

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वच्छता अभियान का आज शुभारंभ किया। उन्होंने भोपाल जिले के लिये स्वच्छता और जल रोकने के जन-जागृति रथों को मुख्यमंत्री निवास से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर बताया गया कि स्वच्छता अभियान के तहत चलित रथ प्रदेश के गांव-गांव, शहर-शहर में जल को रोकने और 'स्वच्छता ही सेवा' के संदेश को जन-संचार के आडियो-वीडियो माध्यम से जन-जन तक पहुंचाएंगे। इस अवसर पर महापौर श्री आलोक शर्मा भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के जन्म दिवस 17 सितंबर को मध्यप्रदेश में सेवा-दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन स्वच्छता को प्राथमिकता देने के सेवा कार्य किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे स्वयं ग्रामीण अंचल में ऐसे क्षेत्रों में जाएंगे, जहां पर अभी भी शौचालयों का पर्याप्त निर्माण नहीं हुआ है। वे गांव के किसी ऐसे घर में भी जाएंगे, जहां पर शौचालय नहीं है। मुख्यमंत्री वहां शौचालय निर्माण के लिये श्रमदान करेंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस अभियान में मंत्री-परिषद के सदस्य भी शौचालय निर्माण के लिये श्रमदान करेंगे। उन्होंने कहा कि जनता को स्वच्छता और शौचालय निर्माण के प्रति संवेदनशील बनाने का यह कारगर प्रयास होगा क्योंकि जनता के सहयोग के बिना स्वच्छता अभियान की सफलता संभव नहीं है।

श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा चलाया गया स्वच्छता अभियान जन-जन का अभियान बन गया है। मध्यप्रदेश भी इस अभियान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहा है। उन्होंने बताया कि विगत दिनों हुए स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रदेश के इन्दौर और भोपाल शहर क्रमश: प्रथम एवं द्वितीय स्थान पर रहे। देश में कुल पुरस्कृत सौ नगरों में से 22 नगर मध्यप्रदेश के हैं। जिन क्षेत्रों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं, उन क्षेत्रों में इस अभियान के अन्तर्गत 15 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच विशेष प्रयास किये जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर घर स्वच्छ हो, यह जरूरी है। इसीलिये महात्मा गांधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे महापुरूष भी स्वच्छता को सर्वमान्य बनाने के पक्षधर रहे।

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