Sunday, 10 September 2017

70 साल के लंबे वकालत के करियर से जेठमलानी ने की संन्यास की घोषणा



वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने शनिवार को सक्रिय वकालत से संन्यास की घोषणा की। सुप्रीम कोर्ट के नए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम में जेठमलानी ने ये बात कही। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के इस कार्यक्रम में जेठमलानी ने कहा, "मैं जस्टिस मिश्रा को बहुत पसंद करता हूँ. लेकिन अफ़सोस है कि अब जब वो चीफ जस्टिस बने हैं, तब मैं उनके सामने पेश नहीं हो सकूंगा। मैंने रिटायर होने का फैसला किया है।"
देश के जाने-माने वकील और पूर्व कानून मंत्री राम बूलचंद जेठमलानी 14 सितंबर को अपना 95वॉ जन्मदिन मनाएंगें। 76 साल के लंबे कैरियर में वह अनेक हाईप्रोफाइल मुकदमों की वजह से चर्चा में रहे हैं। अपने लंबे और बेहद सफल कैरियर से पूरी तरह संतुष्ट राम जेठमलानी ने बताया कि वह आज 95 साल के हो जाएंगे। उन्होंने कहा मैंने लंबा समय वकालत में गुजारा है। अब इस पेशे से अलग होने का समय आ गया है। 14 सितंबर सन 1923 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत के शिखरपुर में जन्मे राम जेठमलानी एक एसे व्यक्ति हैं, जो कालक्रम के साथ निरंतर बदलते रहे हैं। यही खूबी उन्हें अन्य लोगों से अलग करती है।
जेठमलानी का जन्म 14 सितंबर, 1923 में पाकिस्ताेन में हुआ था। उन्होंने 13 साल की उम्र में मैट्रिक की परीक्षा पास की की थी। इसके बाद 17 साल की उम्र में ही उन्होंने एलएलबी की डिग्री हासिल कर ली। कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू करने के पहले उन्होंने सिंध प्रांत में कुछ दिन प्रोफेसर के रूप में भी सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने अपने से सात साल सीनियर एके ब्रोही के साथ मिल कर करांची में ला फर्म खोली। 1948 में करांची में जब करांची में दंगे भड़के तो वह अपने मित्र ब्रोही के सुझाव पर भारत चले आए। ब्रोही बाद में पाकिस्तान के कानून मंत्री बने। हालांकि वह क्रिमिनल ला के विशेषज्ञ माने जाते हैं, लेकिन उन्होंने अनेक दीवानी मामलों में चर्चा बटोरी है। राम जेठमलानी का पहला विवाह दुर्गा जेठमलानी के साथ हुआ था। इसके बाद उन्होंने रत्ना जेठमलानी से विवाह किया। सन 1947 में विभाजन के दौर में उन्हें पाकिस्तान से उजड़ कर मुंबई में बसना पड़ा। मुंबई में उन्होंने एक बार फिर ऩए सिरे से जीवन शुरू किया। उनके दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं। इनमें से उनकी दो संताने महेश जेठमलानी और रानी जेठमलानी देश के जानेमाने वकीलों में गिने जाते हैं। जेठमलानी को अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं| इनमें इंटरनेशनल ज्यूरिस्ट अवॉर्ड, वर्ल्ड पीस थ्रू लॉ अवॉर्ड, फिलीपींस में 1977 में ह्यूमन राइट अवॉर्ड प्रमुख हैं| 07 मई 2010 को वह सर्वोच्च न्यायालय बार काउन्सिल के अध्यक्ष भी चुने गए थे|
शनिवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के सम्मान समारोह में शामिल हुए तो उन्होंने अपने जीवन से संबंधित अनजान पहलुओं को लोगों से साझा किया। महज 17 साल की उम्र में एलएलबी की डिग्री हासिल करने वाले जेठमलानी इस उम्र में भी बेहद जिंदादिल हैं। उनके कुछ किस्से अब भी लोगों के बीच चर्चा के विषय हैं। उनका जीवन मुख्यरूप से दो भागों में विभाजित रहा है। पहले में वह एक प्रतिबद्ध वकील और कानूनविद के रूप में सामने आते हैं, जबकि उनका दूसरा रूप एक समर्पित राजनेता का है।
उन्होंने अपने अनेक चर्चित मामले हाथ में लेकर राष्ट्रीय चर्चाओं में जगह बनाई| जोधपुर जेल में बंद रेप आरोपी आसाराम केस, अरविंद केजरीवाल के लिए जेटली मानहानि केस, 2011 में राजीव गांधी के हत्यारे का केस, इंदिरा गांधी के हत्यारे का केस, जयललिता के लिए बेहिसाब प्रॉपर्टी केस, हर्षद मेहता और केतन पारेख का स्टॉक मार्केट घोटाला, मुंबई माफिया हाजी मस्तान का हवाला घोटाला, जेसिका लाल हत्यााकांड में मनु शर्मा का केस उनके द्वारा लड़े गए चर्चित मामले हैं| लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव, अमित शाह, कनिमोझी, वाईएस जगमोहन रेड्डी, येदियुरप्पा, रामदेव तथा शिवसेना के लिए भी राम जेठमलानी ने मुकदमा लड़ा है। वह संसद हमले में फांसी की सजा पाने वाले अफजल गुरु के भी वकील रहे हैं।
उनहोंने राजनीति में भी लंबी पारी खेली है| जेठमलानी 1971 और 1977 में भाजपा-शिवसेना के सहयोग से मुंबई लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने थे। इसके बाद सन 1996 में अटल बिहारी बाजपेयी सरकार में उन्हें केंदीय कानून मंत्री बनाया गया। इसके बाद वह सन1998 में शहरी विकास मंत्री बने। एक विवादित बयान के चलते एक बार उन्हें भाजपा से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद जेठमलानी ने वाजपेयी के खिलाफ लखनऊ सीट से 2004 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, जिसे वह बहुत बड़े अंतर से हार गए थे। इसके बाद वह फिर से भाजपा से जुड़ गए। भाजपा ने उन्हें सन 2010 में राजस्थान से राज्यसभा भेजा। लेकिन पार्टी के खिलाफ लगातार बयान देने पर उन्हें नवंबर, 2012 में छह सालों के लिए भाजपा से निकाल दिया गया। लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा यहां थमी नहीं। सन 2016 में लालू यादव की पार्टी ने उन्हें फिर से राज्यसभा भेज दिया, फिलहाल वह राजद सांसद हैं।

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